शतरंज खिलाडी तानिया सचदेव क्यों है दिल्ली सरकार से नाराज?
शतरंज खिलाड़ी तानिया सचदेव ने दिल्ली सरकार से मान्यता नहीं मिलने पर दुख जताया

शतरंज खिलाडी तानिया सचदेव क्यों है दिल्ली सरकार से नाराज?
ओलंपियाड स्वर्ण विजेता भारतीय शतरंज खिलाड़ी तानिया सचदेव ने सोमवार को दिल्ली सरकार से ‘मान्यता नहीं मिलने’ पर दुख जताया जिसके बाद मुख्यमंत्री आतिशी ने इस मामले पर ‘विचार और सुझाव’ के लिए उनसे संपर्क किया।
राष्ट्रीय राजधानी में रहने वाली 38 वर्षीय अर्जुन पुरस्कार विजेता तानिया ने कहा कि दिल्ली सरकार ने अभी तक उनकी उपलब्धियों को मान्यता नहीं दी है।
मुद्दा क्या है?
भारत की प्रतिष्ठित शतरंज खिलाड़ी तानिया सचदेव ने दिल्ली सरकार पर यह आरोप लगाया है कि उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हासिल किए गए कई पदकों और उपलब्धियों के बावजूद उन्हें दिल्ली सरकार से कोई विशेष सम्मान या मान्यता नहीं मिली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी इस निराशा को व्यक्त किया और मुख्यमंत्री आतिशी और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को भी टैग किया।
“एक्स”पर तानिया ने लिखी पोस्ट
तानिया ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘2008 से भारत के लिए खेलने के बाद शतरंज में उपलब्धियों के लिए दिल्ली सरकार से मान्यता नहीं मिलना निराशाजनक है। जो राज्य अपने चैंपियन का समर्थन करते हैं और उनका जश्न मनाते हैं वे सीधे उत्कृष्टता को प्रेरित करते हैं और प्रतिभा को प्रेरित करते हैं। दुख की बात है कि दिल्ली ने अभी तक यह कदम नहीं उठाया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘2022 शतरंज ओलंपियाड में मैं ऐतिहासिक टीम कांस्य और व्यक्तिगत पदक जीता। दो साल बाद 2024 में ऐतिहासिक शतरंज ओलंपियाड स्वर्ण पदक और आज तक राज्य सरकार द्वारा कोई मान्यता नहीं दी गई है।’’
उन्होंने आतिशी और उनकी सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को टैग करते हुए उनसे राज्य के शतरंज खिलाड़ियों का समर्थन करने का आग्रह किया।
तानिया सचदेव की उपलब्धियां
- 2022 शतरंज ओलंपियाड में ऐतिहासिक टीम कांस्य पदक
- 2024 शतरंज ओलंपियाड में ऐतिहासिक टीम स्वर्ण पदक
- तानिया, डी हरिका, आर वैशाली, दिव्या देशमुख और वंतिका अग्रवाल भारत की उस टीम में शामिल थीं जिन्होंने हंगरी के बुडापेस्ट में 45वें शतरंज ओलंपियाड की महिला स्पर्धा का खिताब जीता था। यह पहली बार था जब देश ने खिताब जीता था।
- तानिया की अन्य उपलब्धियों में 2022 शतरंज ओलंपियाड में टीम कांस्य के साथ-साथ बोर्ड चार पर व्यक्तिगत कांस्य जीतना शामिल है।
- तानिया 2005 में महिला ग्रैंडमास्टर बनने वाली आठवीं भारतीय थीं।
दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री आतिशी ने तानिया सचदेव के इस मुद्दे पर संज्ञान लिया है और उन्होंने तानिया से संपर्क करके इस मामले पर विचार-विमर्श करने और सुझाव मांगने का आश्वासन दिया है।
क्या कहा मुख्यमंत्रि आतिशी ने?
आतिशी ने कहा, ‘‘हाय तानिया, हमने हमेशा अपने सभी एथलीटों और खिलाड़ियों का समर्थन किया है, खासकर हमारे स्कूलों में। आपसे मिलना और यह समझना अच्छा लगेगा कि शतरंज खिलाड़ियों के लिए और क्या किया जा सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा कार्यालय आपसे संपर्क करेगा और मैं आपके विचारों तथा सुझावों को सुनने के लिए उत्सुक हूं।’’
तमिलनाडु की रहने वाली वैशाली और तेलंगाना की रहने वाली हरिका को उनकी संबंधित राज्य सरकारों ने 25-25 लाख रुपये का पुरस्कार दिया। दिव्या को उनके गृह राज्य महाराष्ट्र ने एक करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार दिया।
यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
- खिलाड़ियों का हौसला: खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन के लिए सम्मानित करना उनके मनोबल को बढ़ाता है और उन्हें और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है।
- खेल को बढ़ावा देना: जब खिलाड़ियों को सरकार द्वारा मान्यता मिलती है तो इससे खेल को बढ़ावा मिलता है और युवा पीढ़ी को खेलों की ओर आकर्षित किया जा सकता है।
- सरकारी नीतियां: यह मुद्दा सरकार की खेल नीतियों पर सवाल उठाता है और यह दिखाता है कि खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं और सम्मान उपलब्ध कराना कितना महत्वपूर्ण है।
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